गुरुवार, 28 अगस्त 2025

श्रीताराप्रसाद दिव्य पंचांग संवत् 2083 शाके 1948 (सन् 2026-27) "मातृदेवो भव रहस्य विशेषांक "का प्रकाशन

श्रीगिरिजा माता की अहैतुकी अनुकम्पा से आगामी संवत् 2083 के श्रीताराप्रसाद दिव्य पंचांग के द्वादश (12वें)अंक तथा श्रीताराप्रसाद दिव्य लघु पंचांग के चतुर्विंशति(24वें)अंक का प्रकाशन हो गया है , इसके विमोचन व वितरण की तिथि की विधिवत् घोषणा भी शीघ्र की जायेगी , विगत वर्षों के अंकों के भांति ही इस अंक में अनेक अश्रुत व अलोकित विषयों के समावेश से यह अंक सर्व सामान्य के लिए अत्यन्त ही उपयोगी सिद्ध होगा ऐसी आशा है , इष वर्ष के कुछ उपयोगी विषय इस प्रकार हैं :-

01-मातृ देवो भव -माता सबसे श्रेष्ठ, माता किसी भी दशा में त्याज्य नहीं , माता-पिता व आचार्य की श्रेष्ठता , माॅ एक शब्द नहीं अपितु मंत्र है, माता यदि प्रतिकूल व्यवहार करे तो क्या करें ?

02-एकादशी व्रत:-शुद्धा विद्धा निर्णय, 03:-सिंहस्थ गुरु में विवाह लग्न एक शास्त्रीय विवेचन, 04-विवाह मेलापक में विशाखा, ज्येष्ठा, आश्लेषा व मूल नक्षत्रों का परिहार।

05:-विवाह मेलापक में कृष्ण चतुर्दशी एवं अमावस्या के जन्म का भ्रम निवारण।

06-दश वर्षों की गुरु-शुक्र अस्त तालिका ।

07-गुरु का द्वादश वर्षीय गोचर , 07-सन् 2050तक के अधिक मासों की तालिका , विवाह लग्नों की विशेष तालिका 08-अधिक मास में क्या करें क्या न करें ,09-रत्न धारण का विशेष रहस्य।

ज्योतिष जगत के आंगन में अर्पित किये गये पंचांग रुपी इस पुष्प से ज्योतिष प्रेमी कुछ भी लाभान्वित हुए तो मैं अपने परिश्रम और साधना को सफल मानते हुए अपने में धन्यता का अनुभव करूंगा । विशेष भगवत्कृपा

प्रस्तुति:-ज्यौतिषाचार्य (डाॅ)रमेश चन्द्र जोशी, प्रधान सम्पादक, श्रीताराप्रसाद दिव्य पंचांग, ज्योतिष-भवन, चित्रकूट, रामनगर, नैनीताल (उत्तराखंड)सम्पर्क-9917759751.

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